शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के नाम पर लघु ग्रह का नाम रखा गया : शास्त्रीय गायक पंडित जसराज ने शास्त्रीय गायन से पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके अब उनकी पहचान के नाम का ग्रह सौरमण्डल में भी दिखाई देगा | अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने वर्ष 2006 में खोजे गए लघु ग्रह इस ग्रह 2006 वीपी 32 का नम्बर भी अब तक 300128 था | इस ग्रह नाम का नम्बर भी पंडित जसराज की जन्मतिथि की जस्ट उल्टा है | पंडित जसराज का जन्म 28 जनवरी 1930 है यानी 280130 है और इस ग्रह का नम्बर 300128 है |

पंडित जसराज के नाम का यह ग्रह सौरमंडल में मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच ब्रहमांड  गतिविधियों के बारे में पता लगाता है | इस ग्रह का नाम पंडित जसराज के नाम पर रखा गया है | पदविभूषण गायक यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय कलाकर है | 

पंडित जसराज संगीत की दुनियाँ में कई आवर्ड मिले और कई सम्मान उनके मिले और अपनी जीवन में गायन की दुनिया में कई बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की | पंडित जसराज अमेरिका में मौजूद  इस सम्मान के बारे में बताया की यह मुझे ईश्वर की असीम कृपा है यह भारतीय संगीत के लिया भगवान का आशीर्वाद है | 

आस्ट्रिया के वोल्फगांग आमेडेयुस मोजार्ट,जर्मनी के लुडविग वान बीथोवन और ब्रिटेन के टेनॉर लुसियानो पवारोटी जैसे महान संगीतकारों के साथ आकाश गंगा में चमकने वाले सितारों के सूची में भारत के पंडित जसराज भारत के पहले भारतीय शास्त्रीय संगीतकार है | 

पंडित जसराज से जुड़ी बाते 

पंडित जसराज 28 जनवरी 1930 में जन्म हिसार में हुआ था | पंडित जसराज के परिवार में उनकी पत्नी मधु जसराज , पुत्र सारंग देव और पुत्री दुर्गा है | पंडित जसराज भारत के सुप्रशिद्ध शास्त्रीय गायकों में से एक हैं | पंडित जसराज का संबंध घराना मेवाती घराने से है | पंडित जसराज जब छोटे थे तब उनके पिता श्री मोतीराम का मृत्यु हो गया था |

उनका पालन -पोषण उनके भाई पंडित मणिराम के देख भाल हुआ | मणिराम के छत्रछाया में पंडित जसराज ने संगीत शिक्षा और तबला वादन को सीखा और उसे अपने जीवन में आगे बढ़ाया 14 वर्ष के अवस्था में उन्होंने तबला बजाना त्याग दिया और वे शास्त्रीय गायन की ओर आगे बढ़ गए | उन्होंने इसके पश्चात मेवाती घराने के दिग्गज महाराणा जयवन्त सिंह वाघेला से तथा आगरा के स्वामी वल्ल्भदास जी से संगीत ज्ञान  शिक्षा को  प्राप्त किया |

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