चंद्रयान-2 के आर्बिटर से लैंडर 'विक्रम' सफलतापूर्वक अलग हुआ

चंद्रयान-2 के आर्बिटर से लैंडर ‘विक्रम’ सफलतापूर्वक अलग हुआ : इसरो ने चंद्रयान -2 आर्बिटर से ‘विक्रम ‘ लैंडर को सफलतापूर्वक अलग कर दिया जो 7 सितम्बर को चांद की सतह पर उतरेगा | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि यह प्रक्रिया अपराह्न 12 बजकर 45 मिनट पर शुरू हुआ और एक बजकर 15 मिनट पर आर्बिटर से ‘विक्रम ‘ अलग हो गया | इसरो के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा ‘ से कहा , ” जी हा, यह सफलतापूर्वक अलग हो गया है | ” लैंडर 7 सितम्बर  को चाँद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में रात 1 बजकर 55 मिनट पर ‘सॉफ्ट लैंडिग ‘ करेगा| लैंडर के चॉंद की सतह पर उतरने के बाद इसके अंदर से ‘प्रज्ञान ‘ नाम का रोवर बाहर निकलेगा और अपने छह पहियों पर चलकर चाँद की सतह पर अपने वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा | ‘लैंडर’ का नाम भारत के अंतरिक्ष मिशन के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर ‘विक्रम ‘ रखा गया है |

चंद्रयान -2 

चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की कक्षा की ओर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया 28 अगस्त, 2019 सफलतापूर्वक संपन्न की थी | इसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार 9 बजकर 4 मिनट पर हुई थी | इस दौरान यान में मौजूद प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था | इस प्रक्रिया में 1190 सेकेंड लगे | और फिर यान 179 किलोमीटर गुणा 1412 किलोमीटर की कक्षा में गया |  उसने कहा , ” अंतरिक्ष यान के सभी मापदंड सामान्य है | इस तरह की अगली प्रक्रिया को 30 अगस्त 2019 को भारतीय समय के अनुसार शाम को छह बजे से 7 बजे के बीच अंजाम दिया गया | ” ‘चंद्रयान -2 ने 20 अगस्त को चाँद की कक्षा में सफलता पूर्वक प्रवेश किया | इसरो ने 21 अगस्त को ‘चंद्रयान-2 ‘ की चन्द्रमा की ओर आगे बढ़ाने की दूसरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यान से ली गई चंद्रमा के दो तस्वीरों के सेट जारी किये थे |

चांद की सतह पर 

चांद की सतह पर पहुंचने के बाद लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान 14 दिनों तक सक्रिय रहेंगे | रोवर इस बीच 1 सेंटीमीटर/सेकेंड की गति से चांद की सतह पर चलेगा और उसके तत्वों की स्टडी करेगा व तस्वीरें भेजेगा | रोवर वहा 14 दिनों में कुल 500 मीटर कवर करेगा | दूसरी तरफ आर्बिटर चन्द्रमा की कक्षा में 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उसकी परिक्रमा करता रहेगा | आर्बिटर वहां 1 साल तक सक्रिय रहेगा |

सॉफ्ट लैंडिग 

इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है की चाँद पर ‘सॉफ्ट लैंडिग ‘ चंद्रयान मिशन -2 का सबसे जटिल चरण है | यदि सब कुछ अच्छा रहता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिग ‘ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा | इसके साथ ही अंतरिक्ष इतिहास में भारत चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा |

चंद्रयान -2 के मिशन पर दुनिया की नजर 

चंद्रयान -2 की लैंडिंग पर पूरी दुनिया की नजर है | नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री डोनाल्ड ए थॉमस ने रविवार को कहा था की पूरी पूरी दुनिया इस मिशन पर नजर लगाए हुए है | हम चंद्रमा के भूमध्य रेखा के नजदीक उतर चुके हैं , लेकिन दक्षिण ध्रुव पर कभी नहीं गए   | यह हमारे लिए बहुत खास है , क्योकि यहा बर्फ मिलने की उम्मीद है | अगर बर्फ मिली तो पानी व वहा आक्सीजन मिलने की संभावना है